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Welcome to Sri Kashi Vedic Sansthan

आज के युग में हमारे जीवन में कई बार ऐसा वक़्त आता है जब हमें किसी अलौकिक शक्ति का एहसास होता है या हमें ऐसी किसी अलौकिक शक्ति की आवश्कता पड़ती है जो हमारे जीवन में सुख -समृद्धि ,धन- वैभव ,विद्या,स्वस्थ  शरीर व मानसिक शांति दे सके .

यह अलौकिक शक्ति हम आज भी प्राप्त कर सकते है रुद्राक्ष,रत्न ,यन्त्र,कवच,पूजन,हवन इत्यादि द्वारा .

भारत के ऋषि मुनियों ने अनेको वर्ष तपस्या कर यह ज्ञान मानव कल्याण हेतु अर्जित किया था जिसका वर्णन हमें वेदों तथा पुराणों में मिलता है.

श्री काशी वैदिक संस्थान में उसी प्राचीन वैदिक वर्णन के अनुसार रुद्राक्ष ,रत्न ,यन्त्र ,कवच,इत्यादि वस्तुओ को अभिमंत्रित तथा सिद्ध किया जाता है.
तथा  हमारे ग्राहकों को इनका वास्तविक लाभ मिल सके यही हमारा उद्देश है 

अगर आप हमारे यहाँ से कोई भी धार्मिक वस्तु लेते है तो निश्चित रहे वह पूरी तरह से असली,शुद्ध ,पवित्र, व भगवान् शिव के आशीर्वाद के साथ ही आप तक पहुंचेगी .

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Radha Krishana Brass Idol
Radha Krishana Brass Idol

Beautiful crafted and finished Radha Krishna Brass Idol with Nickel Polish Ideal for Home/Office

Rs. -1650 USD($) -24
3 Mukhi Rudraksha Beads (Nepal)
3 Mukhi Rudraksha Beads (Nepal)

3 मुखी रुद्राक्ष प्रत्येक रुद्राक्ष में जीवन के किसी न किसी पहलू को लाभान्वति करने का विशिष्ट गुण होता है। यह कैरियर, परिवार, प्रेम या स्वास्थ्य से जुड़ा हो सकता है। 3 मुखी रुद्राक्ष (3 Mukhi Rudraksha) की सतह पर 3 प्राकृतिक रेखाएं होती हैं, जो उसकी असली होने की पहचान को दर्शाता है। यह रुद्राक्ष नेपाल और इंडोनेशियां में पाया जाता है। 3 मुखी रुद्राक्ष मुख्य रूप से स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए काम करता है। यह अग्निदेव का स्वरूप माना गया है। अग्नि देव कठोर वैदिक देवता हैं, जो उग्र और शक्तिशाली हैं। इस रुद्राक्ष के अधिपति ग्रह मंगल है। यह मंगल और सूर्य से संबंधित दोषों को दूर करने के लिए धारण किया जाना चाहिए। 3 मुखी रुद्राक्ष पहनने वाले के आस-पास की नकारात्मक ऊर्जा को जला देता है और व्यक्ति के बुरे कर्म को नष्ट कर देता है, जिसेस व्यक्ति अपराध मुक्त और तनाव मुक्त हो जाता है।  वैदिक ज्योतिष के अनुसार, हम अपने पुनर्जन्म से जुड़े हुए हैं जो हमारे वर्तमान और भविष्य के जीवन की नींव रखते हैं। कुछ लोग पिछले कर्मों के काऱण इस जन्म में पीड़ित रहते हैं। 3 मुखी रुद्राक्ष(3 Mukhi Rudraksha) का संबंध ब्रह्मा विष्णु और महेश से है इसके अलावा इसे धरती, आकाश और पाताल से भी जोड़ा जाता है। इसको पहनने वाले का स्वास्थ्य, धन और ज्ञान का में बढ़ोत्तरी होती है। धारक को किसी भी प्रकार की बिमारी नहीं होती है और शत्रुओं का नाश होता है। यह उन लोगों में आत्म प्रेम को बढ़ावा देने में मदद करता है जिनके पास आत्मघृणा और मानसिक तनाव है। 3 मुखी रुद्राक्ष की खासियत यह है कि इसे धारण करने के कुछ समय बाद ही इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई देने लगता है। मुखी रुद्राक्ष(Teen Mukhi Rudraksha) पहनने के फायदे 3 मुखी रुद्राक्ष पहनने से मानसिक और शारीरिक शांति मिलती है यह तनाव से मुक्ति और सफलता पाने में मदद करता है यह उन सभी नकारात्मक यादों को मिटाने में मदद करता है जो आपको शर्म और गुस्से से भर देती हैं यह पेट की सभी प्रकार की समस्याओं को ठीक करने में मदद करता है यह प्लेग, चेचक पीलिया जैसी बीमारियों का इलाज करने में मदद करता है यह अतीत और वर्तमान जीवन में सभी प्रकार के पापों को दूर करता है यह रक्तचाप, मधुमेह और रक्त संक्रमण को नियंत्रित करने में मदद करता है यह महिलाओं के मासिक धर्म की समस्याओं को ठीक करने में मदद करता है यह आलस त्यागने और अधिक सक्रिय और सतर्क बनने में मदद करता है यह जीवन पर मंगल ग्रह के दुष्प्रभाव का इलाज करता है यह भूमि विवाद, दुर्घटना और भय जैसी समस्याओं को दूर करने में आपकी मदद करता है यह पहनने वाले को सफलता प्राप्त करने के लिए ऊर्जा और उत्साह से भरपूर करता है >3 मुखी रुद्राक्ष को धारण करने की विधि <  3 मुखी रुद्राक्ष को पहनने का दिन सोमवार या गुरुवार हो सकता है। रुद्राक्ष को धारण करने से पहले मंत्रो के साथ इसको अभिमंत्रित कर लेना चाहिए। सबसे पहले प्रातकाल स्नानादि के बाद रुद्राक्ष को गंगाजल औऱ कच्चे दूध में रखें। इसके बाद हनुमान जी की प्रतिमा पर लाल पुष्प अर्पित करें और उनकी पूजा-अर्चना करें। आप रुद्राक्ष मंत्र ‘ॐ क्लीं नमः’का 108 बार जाप करें। वहीं इस रुद्राक्ष को मेष, वृश्चिक और धनु लग्न और राशि के जातकों को धारण करना शुभ माना जाता है। श्री काशी वैदिक संस्थान, काशी के विद्वान आचार्य द्वारा अभिमंत्रित कर के भेजा जाता है l  3 Mukhi Rudraksha benefits Since the 3 mukhi Rudraksha is blessed by the Tridev, its wearer can enjoy the following benefits: It removes the malefic effects of Mars and the Sun. It is beneficial for natives with Mangal Dosha. The wearer gets success in every new venture and all his work. His words, thoughts and actions have no difference. They are in perfect sync with each other. All the miseries and grievances are absorbed by the Rudraksha and thrown out of the wearer’s life, leaving him with only happiness. The one who possesses it can easily come out of unwanted habits. The wearer is blessed with prosperity and peace. It gives favourable results to those who face an inferiority complex and go through self-hatred phase. It liberates the wearer of the past evil karmas. It cures the patient of chronic fever. It helps in resolving land disputes. It cures diseases related to blood pressure and kidney. It provides relief to women from the menstrual pain and cures diseases related to it. It resolves the sexual issues of couples.

Rs. -250 USD($) -4
Prosperous Kamdhenu Cow
Prosperous Kamdhenu Cow

कामधेनु गाय का हमारे सनातन धर्म में बहुत अधिक महत्त्व होता है। यह समस्त कामनाओं को पूर्ति करने वाली होती है।  यह कामधेनु गाय की प्रतिमा घर में रखने से समृद्धि होती है और धन धान्य की कमी नहीं होती है  "Kamadhenu (kama-dhenu, 'wish-cow'), was a miraculous cow of plenty who could give her owner whatever he desired. She was sometimes said to be the daughter of Daksha, and the wife of the rishi Kasyapa. Kamadhenu appeared on earth as one of the precious things that were brought to light in the Churning of the Ocean. The gods presented her to the sapta-rishis and she became the property of the sage Vasishtha. The Ramayana relates that the sage Visvamitra once paid a visit to the hermitage of Vasishtha and was received and entertained with great hospitality. At the hermitage he saw the priceless Kamadhenu who had provided all the delightful things for the repast he had just enjoyed, and he was filled with covetousness for her. He offered Vasishtha all he owned for the cow but the offer was declined. He then attempted to take her away by force but Kamadhenu broke away from his grasp and magically conjured up warriors to defend herself and her master. Visvamitra next summoned a few hundred of his sons to battle for her, but Vasishtha reduced them all to ashes with a hot blast of rage from his mouth. In the long and fierce struggle between Visvamitra and Vasishtha the former suffered a humiliating defeat and for this reason resolved to become a brahmin on his own merit and so equip himself for equality with his brahmin rival. In another legend Kamadhenu was killed by the exiled king Trisanku to provide food for the sons of Visvamitra. The calf of Kamadhenu was acquired by the sage Jamadagni after years of penance. It was coveted and stolen by the Haihaya king Kartavirya, which led to a wholesale massacre of kshattriyas by Jamadagni's son Parasurama. Kamadhenu is also called Surabhi (hence her descendants or worshippers are called Saurabheya); Kamadugha; Kamaduh; Savala and Nandini (this last name was also given to the daughter of Kamadhenu). Kamadhenu's motherhood and nourishing attributes are emphasized through her twin breasts. The Puranas declare "she is a goddess with marvellous powers and attainments who gives milk whenever needed by gods and sages," and that "all the cattle in the world today are descended from Kamadhenu"."

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Godess Durga Idol ( Brass )
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Maa Durga Brass Idol with Nickel Polish. Clear Finishing with closed mouth lion  Ideal for Worship at home temple.

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SUGANDHI  Sambarani/Dhuna Dhoop Agarbatti ( pack of 12)
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Sri Ram Charit Manasa ( The Holy Lake of the Acts of Rama) In this Award Winning Book Contain Every thing to understand Ramayana  It has Awadhi Choupais and Dohas Which were written by Goswami TulsiDas and it's translation in Hindi and English. It has also Hanuman Chalisa in same way and a Dictionary also.

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Energized Navratan Kachua Make : Made of copper metal and having nine intimation gems on it. Benefices : It is used for remove negative reflections in home or work place.(Many problem are caused due to negative reflections of planets ) Suitable for every one. Effective from 1st day of establishment.

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SIVA MAHAPURANA ( An Exhausitive Introduction, Sanskrit Text, English Translation
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SIVA MAHAPURAN An exhaustive Introduction, Sanskrit Text, English Translation with Photographs of Archaeological Evidence. Translated into English by Shanti Lal Nagar.

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