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Poojan Service at Temples of Kashi

Rudrabhishek,SankatMochan Poojan,MahaMritunjay Jaap and all other Poojan service at Temples of Kashi

Products for Poojan Service at Temples of Kashi

Maha Mrityunjay Mantra Jaap & Ritual  (Anusthan) at Kashi
Maha Mrityunjay Mantra Jaap & Ritual (Anusthan) at Kashi

Maha Mrityunjay Mantra Jaap & Anusthan at  Mritunjaya MahadevTemple, Varanasi  Meaning of Mahamrityunjay Mantra:  We worship and adore You, O three-eyed One, O Shiva. You are sweet gladness, the fragrance of life, which nourishes us, restores our health, and causes us to thrive. As, in due time, the stem of the cucumber weakens, and the gourd is freed from the vine, so free us from attachment and death, and do not withhold immortality. Importance of Mahamrityunjay Mantra Jaap & Anusthan The maha mrityunjay mantra is a prayer to Lord Shiva who is addressed as Shankara and Trayambaka. Shankara is shana (blessings) and Kara (the Giver). Trayambaka is the three eyed one (where the third eye signifies the giver of knowledge, who destroys ignorance and releases us from the cycle of death and rebirth). The Maha Mrityunjay Mantra or Lord Shiva Mantra is considered extremely powerful and significant by the Hindus. Also known as the Moksha Mantra of Lord Shiva, chanting of Maha Mrityunjaya Mantra is said to create divine vibrations that heals. Devotees of Lord Shiva further believe that Maha Mrityunjay evokes the Shiva within human beings and removes the fear of death, liberating one from the cycle of death and rebirth. The Maha Mrityunjaya mantra restores health and happiness and brings calmness in the face of death. When courage or determinations are blocked, it rises up to overcome obstacles. It awakens a healing force that reaches deep into the body and mind. Importance of Mahamritunjaya Mantra Jaap & Anusthan at Kashi Mrityunjay Mahadev Temple. Mritunjaya Mahadev Temple is situated at Vishshswarganj area of Varanasi. Mrityunjay Mahadev Temple in Varanasi is the very famous and glorious temple. This temple is the holy place of worship and belongs to the Lord Mahadev (Known as Lord Shiva by pilgrims). The history of this temple is all behind an ancient well and “The Shivling”. The meaning of the word Mrityunjay Mahadev is “The God who triumphs over of death”. It is considered as, the Shivling in this temple keep away all the devotees from their unnatural death. Lord Shiva is worshiped as Mrityunjay Mahadev by devotees in order to get triumph over his unnatural death. People from all over India come here and perform “Mrityunjay Path” to get rid of their problems. In the campus of the temple there is an ancient well (also known as koop). The water of this well has therapeutic effect on human beings. It is considered as it has mixture of several underground water streams and has miraculous effect for curing numerous diseases. Another story behind the magical well is that, a famous person “Dhanvantari” (father of the Ayurveda) has poured all his medicine in that well, that’s why the water of this well is sacred and has medicinal effect as well as able to cure various diseases. Devotees strongly believe that proper recitation of the Maha Mrityunjaya rejuvenates, bestows health, wealth, long life, peace, prosperity and contentment. It is said that chanting of Shiva Mantra generates divine vibrations that ward off all the negative and evil forces and creates a powerful protective shield. Besides, it is said to protect the one who chants against accidents and misfortunes of every kind. Those who are unable to come to this temple can also get benefits. Priest  (Purohit) perform (Pooja) Ritual for the person and starts chanting  Mahamritunjaya Mantra at Mritunjaya Mahadev Temple after completion of Pooja and chanting mantras Prasasd and Other Pooja items sent to the person who organized the Ritual (anusthan) of Maha Mritunjya so, the person who organized  the ritual (anusthan) gets the same benefits which can be got by worshiping and chanting mantras at Mrityunjay Mahadev Temple, Kashi. श्री काशी वैदिक संस्थान द्वारा काशी स्थित मृत्युंजय महादेव मंदिर में महा मृत्युंजय मंत्र जाप व पूजा योग्य पुरोहितो द्वारा की जाती है मंदिर परिसर में  महा मृत्युंजय मंत्र जाप व मृत्युंजय महादेव की पूजा करवाने से  कार्य सिद्धि लाभ प्राप्त होते है खोयी हुई खुशियाँ व् स्वस्थ जीवन पुनाढ़स्थापित होता है मानसिक शांति ,उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति के लिए, जीवन से नाकारात्मकता दूर करने के लिए ,उन्नति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए यह अनुष्ठान करवाना बहुत ही उत्तम होता है जो भी व्यक्ति यह महा अनुष्ठान करवाने को इच्छुक हो वो कृपया संस्थान से संपर्क कर सकते है महा मृत्युंजय अनुष्ठान की प्रक्रिया : अनुष्ठान व मंत्र जाप आरम्भ करने के तिथि /मुहर्त निश्चित करने के उपरान्त आपको सूचित किया जाएगा तत्पश्चात निश्चित तिथि को किसी भी संचार माध्यम से आपसे पुरोहित जी द्वारा संकल्प करवाया जाएगा अनुष्ठान पूर्ण होने पर मंदिर कूप का पवित्र जल, पूजा प्रसाद , ३ सिद्ध महा मृत्युंजय कवच ,अनुष्ठान की फोटो  /विडियो (यदि संभव हो तो ) इत्यादि कोरियर /डाक द्वारा आपके पते पर भेजा जाएगा ॐ नमः शिवाय  Sri Kashi Vedic Sansathan organize Maha Mrityunjay Mantra Jaap & Ritual (Pooja) by suitable priest at Mrityunjay Mahadev Temple situated at kashi The Maha Mrityunjay Mantra Jaap and performing Ritual (pooja) at Mrituyunjaya Mahadev Temple campus   restores health and happiness and brings calmness in the face of death. When courage or determinations are blocked, it rises up to overcome obstacles. It awakens a healing force that reaches deep into the body and mind. Any person who is willing to conduct this Pooja can contact to us. Process of Maha Mrityunjay ritual: We will inform you once a suitable date /muhrt  is decided then on the same date the priest will communicate with you by any means of communication to take resolution (Sankalp) After the completion of ritual , Holy water of Mrityunjay Mahadev Temple well , Pooja Prasad, 3 energized Maha Mrityunjay Kavach , photographs of ritual (video if possible )  etc. will be sent at your address through courier.

Rs. -5100 USD($) -100
Nav Ratri Pooja At Nav Durga Temple at Kashi for Nine Days
Nav Ratri Pooja At Nav Durga Temple at Kashi for Nine Days

पुरे विश्व में काशी एक मात्र स्थान है जहाँ माँ दुर्गा के नव स्वरुप प्राचीन काल से काशी में आठों दिशाओं पर स्थापित है तथा शारदीय नवरात्रों में इन सभी स्वरूपों के दर्शन व् पूजन करने देश विदेश से हज़ारों श्रद्धालु आते है नवरात्रों के नव दिनों में यहाँ अलग अलग स्वरूपों का दर्शन व् पूजन करने का विधान है मान्यता है की जो कोई भी नवरात्रों में माता के इन सभी स्वरूपों के दर्शन व् पूजन करता है उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते है सभी मनोकामना पूर्ण होती है और देवी माँ अपने भक्तो की सदैव रक्षा करती है श्री काशी वैदिक संस्थान नवरात्र के इस पावन पर्व पर काशी में स्थित नवदुर्गा के सभी मंदिरों में नौ दिनों तक माता के प्रत्येक स्वरुप का पूजन उसी मंदिर में श्रद्धालुओ  के लिए आयोजित कर रहे है नौ दिन तक पूजन के पश्चात श्रद्धालुओ  को डाक द्वारा प्रसाद इत्यादि भेजा जाएगा १. प्रत्येक मंदिर का प्रसाद २. माता की चुनरी (प्रत्येक मंदिर की अलग ) ३. नवदुर्गा का सिद्ध कवच (धारण करने हेतु ) व् यन्त्र (स्थापित करने हेतु ) ४. नवदुर्गा विग्रह जिस प्रकार से माता के विभिन्न स्वरुप है उसी प्रकार माता के इन स्वरूपों का दर्शन पूजन का फल भी विभिन्न है काशी की आठो दिशाओ में स्थापित माता के मंदिर का नाम व्  महत्व इस प्रकार है  1. शैलपुत्री देवी: नवदुर्गा का पहला रूप शैलपुत्री का है। काशी के अलईपुरा इलाके में इनका मंदिर बना है। हिमालय के यहां जन्म लेने के कारण देवी का नाम शैलपुत्री पड़ा। शैलपुत्री देवी का वाहन वृषभ है। उनके दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल है। इन्हें पार्वती का स्वरूप भी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि देवी के इस रूप ने ही शिव की कठोर तपस्या की थी। कहा जाता है कि इनके दर्शन मात्र से शादी में आ रही रुकावटें दूर हो जाती हैं। 2. ब्रह्मचारिणी देवी: देवी के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी देवी का मंदिर दुर्गाघाट में स्थित है। इस स्वरूप में देवी तप का आचरण करने वाली हैं। ऐसे में उन्हें ब्रह्मचारिणी कहा जाता है। उनका स्वरूप ज्योतिर्मय और बेहद भव्य है। इनके दाएं हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल रहता है। जो भक्त देवी के इस रूप की आराधना करता है, उसे साक्षात परम ब्रह्म की प्राप्ति होती है। 3. चंद्रघंटा देवी: नवरात्रि के तीसरे दिन देवी देवी के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा की जाती है। काशी में इनका मंदिर चौक इलाके में स्थित है। माता का यह स्वरूप शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र बना हुआ है। इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। इनके शरीर का रंग सोने की तरह चमकीला है। इनके दस हाथ होते हैं। इनका वाहन सिंह है। इनकी मुद्रा युद्ध के लिए तैयार रहने की होती है। 4. कुष्मांडा देवी: यह देवी मां का चौथा स्वरूप है। इनका मंदिर दुर्गाकुंड में स्थित है। मान्यता है कि देवी मां ने अपनी हंसी से ब्रह्मांड को उत्पन्न किया था। इस कारण उनका नाम कुष्मांडा देवी हो गया। इन्हें सृष्टि की आदि स्वरूपा माना जाता है। इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। इनके सात हाथों में कमंडल, धनुष-बाण, कमल, फूल, अमृत पूर्ण कलश, चक्र और गदा है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है। देवी का वाहन सिंह है। 5. स्कंदमाता देवी: आदि शक्ति का पांचवां स्वरूप स्कंदमाता है। जैतपुरा इलाके में इनका मंदिर स्थित है। स्कंद कुमार यानि कार्तिकेय की मां होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। देवी मोर की सवारी करती हैं और कमल पर विराजमान रहती हैं। इनकी गोद में बाल स्कंद कुमार बैठे रहते हैं। इसी कारण से इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। संतान सुख के लिए इनका दर्शन करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि पूजा से देवी प्रसन्न होती हैं और भक्त की गोद भर देती हैं। 6.कात्यायनी देवी: देवी का छठा स्वरूप कात्यायनी देवी है। काशी में इनका मंदिर सिंधिया घाट मोहल्ले में है। माना जाता है कि देवी ने महर्षि कात्यायन की बेटी के रूप में अवतार लिया था। इसलिए उनका नाम कात्यायनी पड़ा। ऋषि कात्यायन ने लगातार सप्तमी, अष्टमी और नवमी को इनकी पूजा की थी। दशमी के दिन देवी ने महिषासुर का वध किया था। इनका स्वरूप भव्य और दिव्य है। इनकी अराधना से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कहा जाता है कि रुक्मिणी ने भी कात्यायनी देवी की आराधना कर कृष्ण को पति के रूप में पाया था। 7. कालरात्रि देवी: देवी मां का सातवां स्वरूप कालरात्रि है। इनका मंदिर कलिका गली में है। इनके शरीर का रंग घने अंधेरे की तरह एकदम काला है। सिर के बाल बिखरे हुए हैं। गले में बिजली की तरह चमकने वाली माला है। देवी की तीन आंखें हैं। ये ब्रह्मांड की तरह गोल हैं। इनका वाहन गर्दभ है। देवी अपने दाएं हाथ की वर मुद्रा से सभी भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। देवी का यह स्वरूप देखने में काफी भयानक है, लेकिन इनका दर्शन करना हमेशा शुभ फल देता है। इसी कारण इनका नाम शुभ कारिणी भी है। 8. महागौरी देवी: महागौरी देवी दुर्गा का आठवां स्वरूप है। विश्वनाथ गली में इनका मंदिर है। यहां महागौरी को अन्नपूर्णा देवी के रूप में भी पूजा जाता है। महागौरी देवी वृषभ की पीठ पर विराजमान रहती हैं। उनके माथे पर चांद का मुकुट सजा रहता है। मां अपने चार हाथों में शंख, चक्र, धनुष और बाण लिए हुए हैं। उनके कानों में रत्न जड़ित कुंडल झिलमिलाते हैं। महागौरी देवी अपने भक्तों को सौंदर्य प्रदान करती हैं। 9. सिद्धिदात्री देवी: यह आदि शक्ति माता का नौवां रूप है। सिद्धिदात्री मंदिर बुलानाला में स्थित है। मां भगवती का यह स्वरूप भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियां देता है। वह श्रद्धालुओं की सभी कामनाओं को पूरा करती हैं। माना जाता है कि देवी के नौ रूपों की पूजा तब तक पूरी नहीं मानी जाती, जब तक की सिद्धिदात्री की पूजा नहीं कर ली जाती है।

Rs. -21000 USD($) -350
Dev Guru Brihaspati Pooja & Dosh Nivaran at Kashi
Dev Guru Brihaspati Pooja & Dosh Nivaran at Kashi

देव नगरी काशी जहां विराजते है 33 हजार करोड़ देवी देवता और इस सब के साथ देवताओं के गुरु ब्रृहस्पति भगवान। मोक्ष नगरी काशी में इस गुरु ब्रृहस्पति मंदिर की पौराणिक मान्यता है। अनादि काल से इस जीवंत मंदिर में स्वतः देव गुरु विराजते हैं। अति प्राचीन इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि जब बाबा भोले ने काशी को अपनी राजधानी बनाईं तो देव लोक से देवता भी मोक्ष नगरी काशी में आकर वास करने के लिए लालायित हो उठे। सभी ने बाबा भोले से विराजमान होने की अनुमति मांग आये और यही के होकर रह गए। लेकिन जब देवताओं के गुरु बृहस्पति ने काशी पहुँच बाबा विश्वनाथ से काशी वास की इच्छा जाहिर की तो शिव ने उन्हें गुरु सम्मान देते अपने परिसर के करीब ऊँचाई वाले टीले पर उन्हें सर्वोच्च स्थान इस लिए दिया कि उनके दर्शन प्रतिदिन खुद विश्वनाथ और यहां आये देवता, ग्रह, नक्षत्र उनका दर्शन कर सके। इस मंदिर की धार्मिक मान्यता है कि देव गुरू बृहस्पति नौग्रहों में सर्वश्रेष्ठ गृह हैं और ये धन, मंगल, बुद्धि के देवता है। इसी कारण इनके श्रंगार से लेकर भोग तक सब कुछ पीले रंग का ही इस्तेमाल किया जाता है। हल्दी और पीला चंदन लगाते हैं भक्त इसी कारण यहां आने वाले श्रद्धालु विश्वनाथ के गुरू को पीला वस्त्र, पीला प्रसाद चढ़ाते हैं। भक्त यहां देव गुरू की पूजा करते हैं और मंगल कार्य सिद्ध होने के लिए हाथों में पीली हल्दी पीला चन्दन लगाते हैं। यह स्वयम्भू सलिकग्राम मूर्ति है जो देवों के आराध्य देव ब्रृहस्पति देव हैं। मान्यता है कि यहां ब्रृहस्पति भगवान साक्षात् विराजते हैं।

Rs. -5100 USD($) -101
Musical Sundar Kand Paath At Sankat Mochan Temple, Kashi
Musical Sundar Kand Paath At Sankat Mochan Temple, Kashi

सुन्दर कांड महाकाव्य रामायण का ही एक अध्याय है पर यह अध्याय बहुत महतवपूर्ण है इस अध्याय में स्वार्थ रहित सेवा भक्ति , अद्भुद पराक्रम ,साहस ,सहनशीलता  व सदैव सत्य के साथ रहने के प्रेरणा मिलती है  कलयुग में केवल श्री हनुमान जी ही इस पृथ्वी पर उपस्थित है तथा यह आदेश उन्हें प्रभु श्री राम से प्राप्त हुआ है  यह कांड उनके ही असीम पराक्रम का वर्णन है जिसे गोस्वामी तुलसीदास जी ने काव्य में लिखा है  गोस्वामी तुलसीदास जी ने काशी में ही इस महाकाव्य की (रामायण ) की रचना की थी तथा जब वह इस महाकाव्य को गाते थे तो प्रतिदिन हनुमान जी स्वयं एक कोढ़ी के भेष में यह काव्य सुनने आते थे तथा हनुमान जी ने तुलसीदास जी को स्वयं दर्शन भी दिए थे  गोस्वामी तुलसी दास जी ने काशी में हनुमान जी के संकट  मोचन मंदिर की स्थापना भी की है तथा यहाँ सुन्दर कांड का पाठ करने का बहुत महत्त्व है  ऐसा आज भी माना जाता है की जहाँ भी रामायण का पाठ होता है वहां हनुमान जी अवश्य उपस्थित होते है  सुन्दर कांड का पाठ करना या सुनना या इसका आयोजन करना बहुत ही पुण्य का कार्य है क्योकि जब जब यह आयोजन होता है तो इसके मधुर स्वर जिनके भी कानो में पड़ते है उनके सभी दुःख मिट जाते है तथा यदि आपके किसी कार्य से किसी भी व्यक्ति के दुःख मिटते है तो उससे बड़ा पुण्य संसार में कोई दूसरा नहीं है  सुन्दर कांड का पाठ करना ,सुनना या इसका आयोजन करवाना मानसिक शांति ,भय मुक्त ,रोग मुक्त व सुख समृधि प्रदान करता है  श्री काशी वैदिक संस्थान द्वारा आप भी संगीतमय सुन्दर काण्ड पाठ का आयोजन काशी में करवा सकते है  सम्पूर्ण पूजा व संगीतमय सुन्दरकाण्ड आयोजन का समय - ४ घंटे  पूजा व आयोजन का संकल्प आप के द्वारा किया जाएगा तथा आयोजन के समाप्त होने पर प्रसाद व विडियो सीडी आपके पते पर भेजी जायेगी  यदि यह आयोजन आप काशी के संकट मोचन मंदिर में करवाने के इछुक है तो विडियो सीडी भेजना संभव नहीं हो पायेगा  अधिक जानकारी के लिए कृपया फ़ोन या ईमेल द्वारा संपर्क कर सकते है  Sundar Kand  is a chapter of the epic Ramayana This chapter is very valuable, in this chapter we get inspiration of selfless service and devotion, super strength, courage, endurance and to be always stay with true In kalyug only Sri Hanuman is present on the earth, and he has received orders from the Lord Rama to stay. Sundar Kand is a description of his limitless power in poetry form of the epic The Ramayan written by Goswami Tulsidas Ji  Goswami Tulsidas ji wrote this epic (Ramayana) at Kashi and whenever he was singing this great poetry epic Hanuman ji he had come to hear this poetry in form of a leper. Hanuman Ji also appeared for Goswami Tulsidas for his priceless selfless devotion toward Lord Shri Ram. Goswami Tulsi Das ji also established a beautiful temple known as Sankat Mochan Temple of Hanuman Ji and Lord Ram many devotees form around the world comes here. It is considered that wherever the Paath of Ramayan is going on hanuman ji himself present there in any form. Sunderkand path listening, reading or conducting is the very act of virtue because of its so harmoniously words when it falls in the ears of any one they  forget all his problems and sorrows and if you do something which disappears sorrows of any person is the world’s greatest virtue is no other. Sundar kand Path  listen or held because the very act of virtue when it is organized so harmoniously with the fall in the ears of all their sorrows disappear and you have a task to any person If pain is eradicated from the world's greatest virtue is no other Sundar Kand Paath, reading, hearing or being organized brings peace, fear-free, disease-free and provides all enrichment Sri Kashi Vedic Sansathan,Varanasi organize this Musical Event of Sundarkand at Kashi of your behalf by taking Sankalp Duration of Musical Sundarkand and rituals - 4 hours Worship will be held and organized by the resolution and at the end your offerings and video CD will be sent to your address Sundar Kand Paath conduct at Sankant Mochan Temple, Kashi (Varanasi) For more information, please get in touch by phone or email Jai Shri Ram

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